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Jul 18, 2026 janta24x7news

देश में पहली बार शुरू होगा Engineering Biology UG Course, बायोटेक और मेडिकल सेक्टर में खुलेंगे करियर के नए अवसर

केंद्र सरकार ने देश में पहली बार इंजीनियरिंग बायोलॉजी (Engineering Biology) में स्नातक स्तर का कोर्स शुरू करने की घोषणा की है। साथ ही 2035 तक भारत को वैश्विक बायो इकोनॉमी हब बनाने के लिए राष्ट्रीय रोडमैप भी जारी किया गया है।

देश में पहली बार शुरू होगा Engineering Biology UG Course, बायोटेक और मेडिकल सेक्टर में खुलेंगे करियर के नए अवसर
भारत में उच्च शिक्षा और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने पहली बार देश में इंजीनियरिंग बायोलॉजी (Engineering Biology) विषय में स्नातक (UG) स्तर का कोर्स शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान (Biology), चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) और आधुनिक तकनीकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने वर्ष 2035 तक भारत को वैश्विक बायो इकोनॉमी (Bio Economy) का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए राष्ट्रीय रोडमैप भी लॉन्च किया है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य सेवाओं, जैव-निर्माण (Bio-manufacturing), मेडिकल रिसर्च और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में इंजीनियरिंग बायोलॉजी विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ेगी।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग बायोलॉजी भविष्य की तकनीकों की आधारशिला बनने जा रही है। उनके अनुसार, जिस प्रकार कंप्यूटर साइंस ने डिजिटल क्रांति को गति दी, उसी प्रकार इंजीनियरिंग बायोलॉजी भारत के बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को मजबूत और नवाचार आधारित बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम विकसित करना होगा।

इंजीनियरिंग बायोलॉजी एक बहुविषयक (Interdisciplinary) क्षेत्र है, जिसमें इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान, मेडिकल साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और आधुनिक तकनीकों का समन्वय किया जाता है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ जैविक प्रणालियों (Biological Systems), चिकित्सा उपकरणों, नई दवाओं, स्वास्थ्य तकनीकों और उन्नत अनुसंधान से जुड़े समाधान विकसित करेंगे।

सरकार का कहना है कि भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था में डॉक्टरों और इंजीनियरों के बीच सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगा। अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, मेडिकल रोबोटिक्स, बायोसेंसर और एआई आधारित हेल्थकेयर जैसी तकनीकों में इंजीनियरिंग और मेडिकल विशेषज्ञों को मिलकर काम करना होगा। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह नया स्नातक कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी जानकारी दी कि देश के कई प्रमुख तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों ने मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर इंटरडिसिप्लिनरी (बहुविषयक) पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव दिए हैं। इससे इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सकेगा।

इस अवसर पर सरकार ने "Building India as a Leading Bio Economy Powerhouse by 2035" शीर्षक से राष्ट्रीय रोडमैप भी जारी किया। सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी का आकार लगभग 10 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर करीब 95 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। लक्ष्य है कि इसे वर्ष 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर और 2035 तक दुनिया की अग्रणी बायो इकोनॉमी में शामिल किया जाए।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश में 11,000 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप सक्रिय हैं। यह संख्या भारत में तेजी से बढ़ते नवाचार, अनुसंधान और निवेश को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियरिंग बायोलॉजी जैसे नए कोर्स शुरू होने से छात्रों के लिए बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, रिसर्च, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और एआई आधारित हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में रोजगार और शोध के नए अवसर खुलेंगे।

नई शिक्षा पहल और बायो इकोनॉमी रोडमैप के माध्यम से केंद्र सरकार भारत को वैश्विक बायोटेक्नोलॉजी और विज्ञान आधारित नवाचार के प्रमुख
Author - Janta24x7news
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