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Jul 02, 2026 janta24x7news

तलाक केस में निजी तस्वीरें लगाना गलत! दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- गरिमा से नहीं होगा समझौता

दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक और पारिवारिक विवादों में निजी तस्वीरों व वीडियो के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवाद बदले और बेइज्जती का माध्यम नहीं बन सकते। एक मामले में पति द्वारा तलाक याचिका के साथ पत्नी की निजी तस्वीरें दाखिल करने पर कोर्ट ने इसे गंभीर चूक बताया। हाईकोर्ट ने तस्वीरों को रिकॉर्ड से हटाकर सीलबंद रखने और आगे साझा करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

तलाक केस में निजी तस्वीरें लगाना गलत! दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- गरिमा से नहीं होगा समझौता
दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक और पारिवारिक विवादों में निजी तस्वीरों एवं वीडियो का इस्तेमाल कर एक-दूसरे को बदनाम करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वैवाहिक विवाद किसी की गरिमा और निजता को ठेस पहुंचाने का जरिया नहीं बन सकते।

मामला वर्ष 2022 में हुई एक शादी से जुड़ा है। शादी के लगभग एक साल बाद पत्नी ने पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया। इसके जवाब में पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल करते हुए पत्नी की कुछ निजी और अंतरंग तस्वीरें भी रिकॉर्ड का हिस्सा बना दीं।

इस पर पत्नी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और निजता के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया। उसने दलील दी कि निजी सामग्री को अदालत में पेश करने से पहले फैमिली कोर्ट की अनुमति आवश्यक होती है।

जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति की निजी तस्वीरों को कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल करना गंभीर चूक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमा जीतने की कोशिश में किसी की गरिमा और निजता का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी ने भी जवाब में पति से जुड़ी कुछ आपत्तिजनक सामग्री पेश की थी, लेकिन दोनों मामलों की प्रकृति अलग है। अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को भी सावधानी बरतने की नसीहत देते हुए कहा कि कानूनी लड़ाई के नाम पर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने पति और उसके वकीलों को पत्नी की निजी तस्वीरें आगे साझा करने से रोक दिया। साथ ही फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि इन तस्वीरों को रिकॉर्ड से हटाकर सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाए, महिला की पहचान गोपनीय रखी जाए और अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाई जाए।

हाईकोर्ट का यह फैसला तलाक और पारिवारिक मामलों में निजता के अधिकार और व्यक्तिगत गरिमा की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी माना जा रहा है।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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