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Jun 12, 2026 Soumya

क्या कांग्रेस में होगा TMC और NCP का विलय? ममता-सोनिया मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चा

ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी के संभावित विलय की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। वहीं संजय राउत और नाना पटोले के बयानों ने विपक्षी एकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि कांग्रेस और टीएमसी दोनों ने फिलहाल विलय की अटकलों को खारिज किया है।

क्या कांग्रेस में होगा TMC और NCP का विलय? ममता-सोनिया मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चा
देश की राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संभावित विलय को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह हाल के दिनों में विपक्षी नेताओं के बीच बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां और लगातार हो रही मुलाकातें हैं।

दरअसल, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई कि क्या विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ एक बड़े मंच पर एकजुट होने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की मुलाकात ने भी इन अटकलों को और हवा दी।

इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बयान देते हुए कहा कि वरिष्ठ नेता शरद पवार को छोटे दलों को कांग्रेस के साथ जोड़ने की पहल करनी चाहिए। राउत का मानना है कि यदि विपक्ष को मजबूत बनाना है तो बिखरे हुए दलों को एक मंच पर लाना जरूरी होगा। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने साफ किया है कि टीएमसी के कांग्रेस में विलय की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ऐसी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है।

वहीं टीएमसी ने भी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि कांग्रेस के साथ पार्टी के विलय को लेकर न तो कोई प्रस्ताव है और न ही कोई बातचीत चल रही है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी दलों के नेताओं के बीच मुलाकातों को विलय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के चुनावी घटनाक्रमों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच विपक्षी दल अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं। ऐसे में गठबंधन, सहयोग और संयुक्त रणनीति जैसे विकल्पों पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि चर्चा और वास्तविक विलय में अभी लंबा अंतर दिखाई देता है।

इसी बीच एनसीपी (शरद पवार गुट) के कुछ नेताओं ने भी संकेत दिए हैं कि यदि विपक्ष को मजबूत करने के लिए कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेना पड़े तो उस पर विचार किया जा सकता है। हालांकि पार्टी की ओर से भी फिलहाल किसी औपचारिक विलय की घोषणा नहीं की गई है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्षी दल केवल चुनावी सहयोग तक सीमित रहेंगे या भविष्य में कोई बड़ा राजनीतिक पुनर्गठन देखने को मिलेगा। फिलहाल कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी सभी दलों की नजर आगामी राजनीतिक चुनौतियों और विपक्षी एकजुटता की संभावनाओं पर बनी हुई है।

आने वाले दिनों में नेताओं की बैठकों और राजनीतिक बयानों से इस पूरे मुद्दे की तस्वीर और साफ हो सकती है। लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा ने देश की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है।
Author - Soumya
Credit - Political Desk

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