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Jun 26, 2026 janta24x7news

कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला: निजी फोटो-वीडियो लीक करने पर FIR दर्ज करना अब अनिवार्य, पुलिस की लापरवाही पर होगी कार्रवाई

कर्नाटक सरकार ने डिजिटल गोपनीयता की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब बिना अनुमति किसी की निजी फोटो या वीडियो शेयर या वायरल करने के हर मामले में पुलिस को अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रिकॉर्डिंग की सहमति का मतलब उसे सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं है।

कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला: निजी फोटो-वीडियो लीक करने पर FIR दर्ज करना अब अनिवार्य, पुलिस की लापरवाही पर होगी कार्रवाई
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग के लिए नया निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति की निजी फोटो या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना साझा करने, वायरल करने या प्रसारित करने के हर मामले में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी निजी फोटो या वीडियो रिकॉर्ड करने की सहमति दी थी, तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उस सामग्री को सार्वजनिक करने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करने की भी अनुमति मिल गई। ऐसे मामलों को अब अलग से संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

नए दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करेगी। इनमें बीएनएस की धारा 77 और आईटी एक्ट की धारा 66E, 67 एवं 67A शामिल हैं, जहां ये धाराएं लागू होंगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि पीड़ित ने रिकॉर्डिंग के लिए सहमति दी थी, तब भी केवल इसी आधार पर पुलिस शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने में देरी करना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

यदि निजी फोटो या वीडियो के जरिए किसी व्यक्ति को ब्लैकमेल किया जाता है, पैसे की मांग की जाती है, धमकी दी जाती है या यौन संबंध बनाने का दबाव बनाया जाता है, तो पुलिस को जबरन वसूली और आपराधिक धमकी से जुड़ी अतिरिक्त धाराएं भी लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि घटना किस थाना क्षेत्र में हुई है, यह स्पष्ट नहीं है, तो संबंधित पुलिस स्टेशन पहले जीरो एफआईआर दर्ज करेगा और बाद में मामला संबंधित थाने को भेजेगा। साथ ही जांच अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने, आपत्तिजनक सामग्री को हटाने या ब्लॉक कराने और जरूरत पड़ने पर साइबर क्राइम यूनिट के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेश में यह भी कहा गया है कि पीड़ित के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार किया जाए। उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए और किसी भी प्रकार की विक्टिम ब्लेमिंग से बचा जाए। जहां संभव हो, महिला पीड़ितों की शिकायत महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज की जाएगी, ताकि उन्हें सुरक्षित और सहज वातावरण मिल सके।

सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी इस गलतफहमी में एफआईआर दर्ज करने से इनकार करता है कि रिकॉर्डिंग की सहमति का मतलब उसे साझा करने की भी सहमति है, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

कर्नाटक सरकार का यह फैसला डिजिटल गोपनीयता को मजबूत करने, ऑनलाइन उत्पीड़न पर रोक लगाने और साइबर अपराध के पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे बिना अनुमति निजी फोटो या वीडियो साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी और लोगों की निजता की सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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